Rivers in Himanchal Pradesh

Naman Sharma Last Updated : November 30, 2025
Rivers in himanchal pradesh

हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत का वह अद्भुत राज्य है जिसे देवभूमि कहा जाता है। यह केवल अपने पहाड़ों, जलवायु और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि अपनी विशाल और जीवनदायिनी नदियों के लिए भी जाना जाता है। हिमाचल की नदियाँ पूरे उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि, सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हिमाचल की अधिकतर नदियाँ हिमालय की ऊँची पर्वतमालाओं, हिमनदों (Glaciers) और प्राकृतिक झीलों से निकलती हैं। यही कारण है कि इन नदियों का जल बेहद स्वच्छ, ठंडा और निरंतर बहने वाला होता है। इन नदियों का पानी आगे चलकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए भी जीवनदायिनी बन जाता है।

नीचे हम हिमाचल की प्रमुख नदियों, उनकी उत्पत्ति, सहायक नदियों, लंबाई, धार्मिक महत्व, आर्थिक योगदान और परीक्षाओं के लिए जरूरी तथ्य जानेंगे।

क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश की पर्वतों से निकलने वाली नदियाँ केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और भविष्य को भी आकार देती हैं? इन नदियों ने सदियों पहले हिमालयी पहाड़ियों में अपनी राह बनाई, जिसके बिना आज हिमाचल का हर गाँव, खेत और शहर अधूरा है।

हिमाचल प्रदेश में बहने वाली प्रमुख नदियाँ

हिमाचल की मुख्य नदियाँ पाँच हैं:

  1. सतलुज नदी
  2. व्यास नदी
  3. रावी नदी
  4. चिनाब नदी
  5. यमुना नदी

इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण नदी तंत्र भी हैं:

  • घग्गर नदी
  • पार्वती, स्पीति, उज्ज नदी जैसी सहायक नदियाँ

सतलुज नदी (Sutlej River)

सतलुज नदी हिमाचल प्रदेश की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण नदी है। यह नदी तिब्बत में स्थित मानसरोवर झील के पास राक्षसताल (Rakas Tal) से निकलती है, जहाँ इसकी शुरुआत बहुत ऊँचे बर्फीले पहाड़ों और ग्लेशियरों से होती है। यही कारण है कि सतलुज का पानी बहुत ठंडा और साफ होता है। यह नदी हिमाचल के सुंदर पहाड़ी इलाकों—किन्नौर, शिमला और बिलासपुर से होते हुए आगे पंजाब और हरियाणा में बहती हुई जाती है। सतलुज नदी सिर्फ एक साधारण नदी नहीं है, बल्कि इसने हिमाचल की जीवनशैली, खेती, बिजली, पर्यटन और नदी घाटियों की संस्कृति को बदलकर रख दिया है। हिमाचल में नथपा-झाकरी और कोलडैम जैसे बड़े जल-विद्युत प्रोजेक्ट इसी नदी पर बने हैं। इतना ही नहीं, भारत का सबसे प्रसिद्ध भाखड़ा-नंगल बांध भी इसी नदी पर है, जिसे इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाता है।

सतलुज नदी से कई छोटे-छोटे नाले और सहायक नदियाँ भी मिलती हैं, जिससे यह और ज्यादा बड़ी और तेज़ बहाव वाली बन जाती है। इतिहास में माना जाता है कि सतलुज प्राचीन काल में व्यापार और यात्राओं का मुख्य मार्ग भी थी। आज भी हजारों लोग इस नदी के किनारे खेती करते हैं, मछली पकड़ते हैं और नदी किनारे बनाए गए गांवों में रहते हैं। सतलुज नदी न सिर्फ पानी देती है बल्कि बिजली बनाती है, खेतों को हरा करती है और कई जिलों के लिए पीने का पानी का स्रोत है। यह नदी हिमाचल की शक्ति और जीवन का प्रतीक है। इसकी घाटियाँ, बहाव, बिजली बनाने की क्षमता और प्राकृतिक सुंदरता इसे हिमाचल की सबसे अद्भुत नदी बनाती है।

व्यास नदी (Beas River)

ब्यास नदी हिमाचल प्रदेश की सबसे सुंदर और जीवन देने वाली नदियों में से एक है। यह नदी हिमालय के ऊँचे पहाड़ों के पास रोहतांग दर्रे के पास स्थित ‘ब्यास कुंड’ नाम की जगह से निकलती है। ब्यास नदी का पानी बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से आता है, इसलिए यह बहुत साफ, ठंडा और तेज बहाव वाली होती है। यह नदी कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जैसी घनी पहाड़ी घाटियों से होकर बहती है और आगे पंजाब में जाकर सतलुज नदी से मिल जाती है। ब्यास नदी की वजह से हिमाचल में खेती, फलों के बाग, हरे-भरे जंगल और खूबसूरत पर्यटन स्थल बने हैं। इसी नदी की घाटियों में लोग मछली पकड़ते हैं, खेती करते हैं और जीवन जीते हैं। इसके पानी से कई बड़े बाँध और बिजली परियोजनाएँ भी चलती हैं, जैसे पोंग डैम और पंडोह डैम, जो हजारों गाँवों को बिजली और पानी देते हैं।

ब्यास नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हिमाचल की संस्कृति और इतिहास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुराने हिमाचली और वैदिक ग्रंथों में इसका नाम ‘विपाशा’ लिखा मिलता है और कई पुराने लोक-कथाओं में इसका संबंध ऋषि व्यास से बताया गया है। कहा जाता है कि इसी नदी के किनारे उन्होंने तपस्या की थी और इसी कारण नदी का नाम व्यास पड़ा, जो आगे चलकर ब्यास कहलाया। यह नदी हिमाचल की मिट्टी को उपजाऊ बनाती है, फलों के बागानों को हरा रखती है और लोगों को जीवन देती है। गर्मी में नदी का चमकता नीला पानी और सर्दियों में पहाड़ों से उतरता बर्फीला पानी इसे और खास बनाता है। इसलिए ब्यास नदी को सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि हिमाचल की ताकत, खूबसूरती और प्रकृति का आशीर्वाद माना जाता है।

रावी नदी (Ravi River)

सतलुज नदी हिमाचल प्रदेश की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली नदी मानी जाती है। इसका जन्म तिब्बत के मानसरोवर झील के पास स्थित राक्षसताल से होता है। सतलुज नदी की यात्रा हिमालय के बहुत ऊँचे बर्फीले पहाड़ों से शुरू होकर किन्नौर, शिमला और बिलासपुर जैसे जिलों से गुजरती है। इसका पानी बहुत ठंडा, तेज और साफ होता है। यह नदी आगे पंजाब में जाकर बहती है और सिंचाई, खेती और पीने के पानी का बहुत बड़ा स्रोत बनती है। सतलुज नदी पर बने भाखड़ा नांगल, नथपा झाकरी और कोलडैम जैसी परियोजनाएँ देश की सबसे बड़ी बिजली परियोजनाओं में गिनी जाती हैं।

सतलुज नदी सिर्फ ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि हिमाचल की जीवनरेखा जैसी है। इसके पानी से हजारों गाँवों में खेती होती है, गाँवों में पेयजल पहुँचता है और घाटियाँ हरी-भरी रहती हैं। हिमाचल की कई सहायक नदियाँ और प्राकृतिक झरने इसमें मिलते हैं, जिससे इसकी शक्ति और बढ़ जाती है। सतलुज नदी ने हिमाचल, पंजाब और हरियाणा की अर्थव्यवस्था, खेती और पर्यावरण पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है। इसलिए इसे हिमाचल की सबसे महत्वपूर्ण नदी कहा जाता है।

चिनाब नदी (Chenab River)

चिनाब नदी हिमाचल प्रदेश की सबसे गहरी, तेज और रोमांचक नदी है। यह नदी दो नदियों—चंद्रा और भागा के संगम से बनती है। इनका मिलन स्थल तंडी कहलाता है। चिनाब नदी की घाटियाँ दुनिया की सबसे कठिन और सुंदर घाटियों में गिनी जाती हैं। इसका पानी सीधे बर्फीले पहाड़ों और ग्लेशियरों से आता है। यह नदी लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे पहाड़ी इलाकों में बहती हुई आगे जम्मू-कश्मीर तक जाती है।

चिनाब नदी हिमालय की ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। इसी नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जल परियोजनाएँ बनाई जा रही हैं। इसकी घाटियाँ गहरी, पहाड़ खड़े और बहाव तेज होता है। चिनाब नदी पर्यटकों, किसानों और पूरे क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसे हिमाचल की सबसे शक्तिशाली नदी भी कहा जाता है।

यमुना नदी (Yamuna River)

यमुना नदी का उद्गम हिमालय के यमुनोत्री ग्लेशियर से होता है, जो हिमाचल के पास स्थित है। हालांकि यमुना का मुख्य भाग हिमाचल में नहीं बहता, लेकिन इसकी कई सहायक नदियाँ हिमाचल से आती हैं जैसे गिरि नदी और पब्बर नदी। यमुना नदी बहुत पुरानी और पवित्र नदी है। इसे भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिना जाता है। हिमाचल के कई जिले इसके सहायक नदियों पर निर्भर हैं।

यमुना नदी का भारतीय संस्कृति और इतिहास में बहुत बड़ा स्थान है। इसकी घाटियाँ कृषि, जंगल, गाँव और शहरों के लिए जीवन देती हैं। यमुना नदी को पवित्र माना जाता है और इसके किनारे बसे इलाकों में कई मेले, मंदिर और धार्मिक स्थान हैं। यह नदी न सिर्फ पानी देती है, बल्कि हिमालय की प्राचीन सभ्यता का हिस्सा भी है।

हिमाचल प्रदेश की सहायक नदियाँ

1) स्पीति नदी

  • हिमाचल की सबसे ऊँची और सबसे ठंडी घाटी से बहने वाली नदी है।
  • यह पूरे राज्य की सबसे सूखी और बर्फीली घाटी में बहती है।
  • स्पीति, चंद्रा और भागा जैसी नदियों के साथ चिनाब जल तंत्र बनाती है।

2) पार्वती नदी

  • यह हिमाचल की सबसे तेज़ बहाव वाली सहायक नदी मानी जाती है।
  • पार्वती ही अकेली नदी है जो कसोल–मणिकरण घाटी बनाती है।
  • यह व्यास में मिलने तक लगातार पहाड़ी कठोर चट्टानों को काटकर घाटी बनाती है।

3) उज्ज नदी

  • यह कांगड़ा की मुख्य स्थानीय जल-धारा है, जो सीधे स्थानीय खेती को प्रभावित करती है।
  • उज्ज नदी कांगड़ा की जमीन को सबसे ज्यादा उपजाऊ बनाती है।
  • यह छोटी होते हुए भी सीधे ब्यास और रावी तंत्र को जोड़ने वाली नदी मानी जाती है।

4) घग्गर नदी

  • यह पूरी तरह बारिश पर निर्भर और मौसमी नदी है।
  • हिमाचल से निकलकर मैदानी राज्यों में बाढ़ और सिंचाई का स्रोत बनती है।
  • घग्गर नदी को कई जगह “नाली नदी” कहा जाता है क्योंकि गर्मियों में यह सूख भी सकती है।
नदीकहाँ बहती हैकिस नदी में मिलती हैक्या चीज़ इसे अलग बनाती है
स्पीति नदीस्पीति घाटी, लाहौल-स्पीतिचिनाब नदीसबसे ऊँची, सबसे ठंडी और बर्फीली घाटी में बहने वाली नदी
पार्वती नदीकुल्लू घाटीव्यास नदीसबसे तेज़ बहाव और कसोल–मणिकरण घाटी बनाने वाली नदी
उज्ज नदीकांगड़ा जिलाब्यास/रावी तंत्र से जुड़ीकांगड़ा की मिट्टी को सबसे ज़्यादा उपजाऊ बनाने वाली नदी
घग्गर नदीहिमाचल–पंजाब की सीमाआगे पंजाब–हरियाणा की ओरकेवल बारिश में बहने वाली मौसमी नदी

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